पीड़िता नें पिता पुत्र सहित 6 के विरुद्ध लगाया था आरोप
उक्त मामले मे आरोपित आनन्द द्वारा जुर्म स्वीकार कर लिया गया था
तब उसे वर्ष 2016 में अदालत ने 20 वर्ष कैद एवं 30 हजार का लगाया था जुर्माना
जबकि पीड़िता ने अपने बयानो में उस पर आरोप नहीं लगाया था
आगरा 14 फ़रवरी ।
अपहरण, सामूहिक दुराचार एवं पॉक्सो एक्ट में आरोपित 6 आरोपियों को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट माननीय दिनेश कुमार चौरसिया ने साक्ष्य के अभाव में बरी करनें कें आदेश दिये।
थाना सिकन्दरा मे दर्ज मामले के अनुसार वादी मुकदमा ने थानें पर तहरीर दे आरोप लगाया कि उसकीं 13 वर्षीया पुत्री 16 फरवरी 2015 की सुबह शौच हेतु गयीं थी। उसी दौरान आनन्द, बबलू, सत्यप्रकाश भिक्की उर्फ भीकम सिंह, नरेश, राकेश एवं गगन निवासी गण मोहम्मद पुर, शास्त्रीपुरम, सिकन्दरा जिला आगरा के सहयोग से उसकी पुत्री को बहला फुसला कर भगा ले गया।
आरोपी आनन्द द्वारा 15 जनवरी 2016 को उक्त मामले में अपनी मर्जी से जुर्म स्वीकार करने पर तत्कालीन अदालत द्वारा उसे 20 वर्ष कैद एवं तीस हजार रुपये कें अर्थ दण्ड से दंडित किया था जबकि पीड़िता द्वारा अपने 164 द.प्र.स. के बयानो में उस पर कोई आरोप नही लगाया था।
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उक्त मामले में वादी मुकदमा पीड़िता सहित 6 गवाहों की गवाही दर्ज हुई थीं।
पीड़िता ने सभी आरोपियो के विरुद्ध सामूहिक दुराचार का आरोप लगाया था।
उक्त मामले मे 20 फरवरी 2015 को पीड़िता का डां रुचि रानी द्वारा मैडिकल किया गया था । वहां उसने अपनी मर्जी से आनन्द के साथ जाना एवं सम्बंध बनाना स्वीकार किया था।
उक्त मामले में आरोपित भिक्की उर्फ भीकम एवं नरेश पिता पुत्र हैं । अदालत नें माना कि भारतीय परिवेश में यह संभव नहीं हैं कि कोई भी व्यक्ति अपने सगें भाई वह पिता के सामने किसी लड़की के साथ दुराचार जैसी जघन्य घटना कारित कर सकता हैं ।
अदालत ने साक्ष्य में विरोधाभास एवं आरोपियों कें अधिवक्ताओं जनक कुमारी एवं पंकज यादव के तर्क पर आरोपियों को बरी करने के आदेश दिये।
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