आगरा:
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM), आगरा माननीय मृत्युंजय श्रीवास्तव की अदालत ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए थाना छत्ता पुलिस को विपक्षीगण भजन लाल होतचंदानी और जीतू होतचंदानी के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत कर विवेचना करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश ओमवीर सिंह तोमर द्वारा धारा 173 (4) बी.एन.एस.एस. (BNSS) के तहत प्रस्तुत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद दिया गया।
मामले की पृष्ठभूमि:
प्रार्थी ओमवीर सिंह तोमर ने आरोप लगाया कि वह अर्जुन और जीतू की दुकान पर 15,000/- रुपये प्रति माह की नौकरी करता था।
प्रार्थी के अनुसार दुकान में चोरी होने पर उसे बेवजह पिटवाया गया और टूटे-फूटे लोहे के सामान के जरिए झूठी बरामदगी दिखाई गई, जबकि सीसीटीवी फुटेज में ऐसा कुछ नहीं था।

उसके नौकरी छोड़ने के बाद 26 अगस्त 2025 को पुलिस के एस.आई. सुखवेन्द्र सिंह अन्य पुलिसकर्मियों के साथ आए और कहा कि भजनलाल व जीतू ने उसके खिलाफ चोरी का मुकदमा दर्ज कराया है।
प्रार्थी ने आरोप लगाया कि विपक्षीगण ने प्रार्थी से पूर्व में दिए गए वेतन की वापसी और 4 लाख रुपये की रंगदारी की मांग की तथा जान से मारने की धमकी दी।
अदालत का निष्कर्ष:
प्रार्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता के तर्कों को सुनने और पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों (जैसे पुलिस आयुक्त को प्रेषित शिकायत और रजिस्ट्री रसीद) का अवलोकन करने के बाद अदालत ने पाया कि प्रकरण में प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का होना परिलक्षित होता है साथ ही मामले की निष्पक्ष विवेचना कराए जाने के पर्याप्त आधार मौजूद हैं।
न्यायालय का आदेश:
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट माननीय मृत्युंजय श्रीवास्तव ने प्रार्थी के आवेदन को स्वीकार करते हुए थानाध्यक्ष, थाना छत्ता को आदेशित किया है कि वे प्रार्थना पत्र में वर्णित तथ्यों के आधार पर विपक्षीगण भजन लाल होतचंदानी और जीतू होतचंदानी के विरुद्ध संबंधित धाराओं में अभियोग पंजीकृत करें और नियमानुसार विवेचना सुनिश्चित करें।
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