आगरा 2 जुलाई ।
आगरा में एक बहुचर्चित बलात्कार, धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र के मामले में नया मोड़ आ गया है। इस मामले में आरोपी आतिफ पठान और उसके चाचा कासिफ को साक्ष्य के अभाव में अदालत ने बरी कर दिया है।
यह फैसला तब आया जब पीड़िता और वादी दोनों ही अपने पूर्व बयानों से मुकर गए, जिसके बाद अदालत ने वादी के विरुद्ध विधिक कार्यवाही के आदेश दिए हैं।
यह मामला थाना हरीपर्वत में दर्ज हुआ था। वादी मुकदमा ने अपनी तहरीर में आरोप लगाया था कि उनकी 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली बेटी कई दिनों से डरी-सहमी रहती थी।
पूछने पर बेटी ने बताया कि छह महीने पहले उसकी दोस्ती सोशल मीडिया के माध्यम से “बाबू” नामक युवक से हुई थी। बाबू ने मीठी-मीठी बातें करके उसे अपने प्रेम जाल में फंसा लिया।
वादी के अनुसार, 7 फरवरी 2021 को बाबू उनकी बेटी को संजय प्लेस स्थित अपने दोस्त निखिल के ऑफिस ले गया। वहां उसने नशीली कोल्ड ड्रिंक पिलाकर बेटी को अर्ध-बेहोशी की हालत में उसके साथ दुष्कर्म किया और अश्लील वीडियो तथा फोटो ले लिए।
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होश आने पर आरोपी बाबू ने शिकायत करने पर वीडियो और फोटो वायरल करने की धमकी दी। बाद में पता चला कि आरोपी का नाम बाबू न होकर आतिफ पठान था और उसने “लव जिहाद” के तहत वादी की पुत्री को अपने जाल में फंसाया था। आरोप था कि इस कृत्य में उसके चाचा कासिफ ने भी सहयोग किया था।
वादी की तहरीर पर आतिफ पठान और उसके चाचा कासिफ के विरुद्ध संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। अभियोजन पक्ष की ओर से वादी मुकदमा, पीड़िता सहित चार गवाह अदालत में पेश किए गए। हालांकि, अप्रत्याशित रूप से पीड़िता, वादी सहित सभी गवाह अपने पूर्व बयानों से मुकर गए।
अदालत ने आरोपियों के वरिष्ठ अधिवक्ता दीपक कुमार शर्मा के तर्कों को स्वीकार करते हुए और साक्ष्य के पूर्णतया अभाव में आतिफ पठान और उसके चाचा कासिफ को बरी करने का आदेश दिया। इसके साथ ही, अदालत ने गवाही से मुकरने पर वादी मुकदमा के विरुद्ध विधिक कार्यवाही के आदेश भी दिए हैं।
इस फैसले ने न्याय प्रणाली के समक्ष एक बड़ी चुनौती पेश की है और यह सवाल खड़ा किया है कि ऐसे मामलों में न्याय कैसे सुनिश्चित किया जा सकता है जब गवाह अपने बयानों से पलट जाते हैं।
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