इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त आदेश: आगरा के कैलाश-बिचपुरी स्कूल की प्रधानाचार्या तलब, स्कूल रिकॉर्ड जाँच का निर्देश

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आगरा/प्रयागराज ।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आगरा के उच्च प्राथमिक विद्यालय (कॉम्पोजिट स्कूल), कैलाश-बिचपुरी से जुड़े एक एक मामले में सख्ती दिखाई है। न्यायालय ने स्कूल की प्रधानाचार्या को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होने और एक छात्रा से संबंधित सभी महत्वपूर्ण रिकॉर्ड प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

मामला क्या है ?

माननीय न्यायमूर्ति जे.जे. मुनिर और न्यायमूर्ति संजीव कुमार, जे. की खंडपीठ के समक्ष ‘राज्य बनाम उत्तर प्रदेश एवं अन्य’ मामले की सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया गया। यह मामला जूली गोस्वामी नामक एक छात्रा के स्कूल रिकॉर्ड से संबंधित है।

कोर्ट ने प्रधानाचार्या को विशेष रूप से यह स्पष्टीकरण देने के लिए तलब किया है कि दिनांक 07.07.2025 को उनके द्वारा जारी किया गया लिविंग प्रमाण पत्र संख्या 91 किस आधार पर निर्गत किया गया था।

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प्रधानाचार्या को निर्देश:

* उपस्थिति: प्रधानाचार्या को दिनांक 04.11.2025 को अपराह्न 2:00 बजे न्यायालय में बिना असफलता उपस्थित होना होगा।

* दस्तावेज: उन्हें छात्रा के प्रवेश रजिस्टर, उपस्थिति रजिस्टर, स्कूल ट्रांसफर रजिस्टर और निरुद्धा (छात्रा) की जन्मतिथि से संबंधित सभी मूल अभिलेख साथ लाने का निर्देश दिया गया है।

न्यायालय ने आज माननीय ए.जी.ए. (सरकारी अधिवक्ता) द्वारा दाखिल किए गए अनुपालन हलफनामे को अभिलेख पर लिया।

छात्रा की वापसी और सुरक्षा के आदेश:

कोर्ट में उपस्थित निरुद्धा (छात्रा) को तत्काल राजकीय बालिका गृह (बालिका), गौतम बुद्ध नगर वापस भेजने का आदेश दिया गया है।

* सुरक्षा सुनिश्चित: कोर्ट ने राजकीय बालिका गृह (बालिका), गौतम बुद्ध नगर की अधीक्षिका और आगरा के पुलिस आयुक्त को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि निरुद्धा को अगली तिथि पर न्यायालय के समक्ष आवश्यक रूप से उपस्थित किया जाए।

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इस मामले को अगली सुनवाई के लिए 04.11.2025 को अपराह्न 2:00 बजे सूचीबद्ध किया गया है। कोर्ट के इस आदेश की प्रति तत्काल अनुपालन हेतु चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट, आगरा के माध्यम से प्रधानाचार्या और संबंधित अधिकारियों को तामील की जाएगी।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता जिज्ञासा त्रिपाठी और सुरेन्द्र कुमार त्रिपाठी है ।

इस मामले ने स्थानीय शिक्षा अधिकारियों के बीच हड़कंप मचा दिया है और सभी की निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं।

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विवेक कुमार जैन
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