अधिकारियों को ऐसे आदेश पारित नहीं करने चाहिए, जो उनकी अक्षमता को उजागर करते हों: इलाहाबाद हाईकोर्ट

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आगरा /प्रयागराज 26 अगस्त ।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा ट्रांसफर के लिए मानदंड पूरा करने के बावजूद सहायक अध्यापक का ट्रांसफर आवेदन खारिज करने के निर्णय पर नाराजगी व्यक्त की। आवेदन को इस आधार पर खारिज किया गया था कि प्रधानाध्यापक, जिला विद्यालय निरीक्षक जिला मजिस्ट्रेट के आधिकारिक कार्य में व्यस्त थे।

जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल ने कहा,

“यह न्यायालय राज्य सरकार द्वारा निर्धारित मानदंडों को पूरा करने के बावजूद आवेदन पर विचार न करने के लिए संबंधित अधिकारी के खिलाफ नाराजगी दर्ज करता है। आवेदन इस आधार पर वापस कर दिया गया कि प्रधानाध्यापक जिला विद्यालय निरीक्षक और जिला मजिस्ट्रेट के आधिकारिक कार्य में व्यस्त थे। यह न्यायालय आगे यह दर्ज करना चाहेगा कि संबंधित अधिकारी को ऐसे आदेश पारित नहीं करने चाहिए, जो उनकी अक्षमता को उजागर करते हों।”

 

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याचिकाकर्ता सहायक अध्यापक ने राजकीय हाई स्कूल शामली से मेरठ में ट्रांसफर के लिए आवेदन किया था। हालांकि, जिला विद्यालय निरीक्षक ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि संस्थान में केवल दो सहायक अध्यापक हैं और प्रधानाध्यापक आमतौर पर प्रशासनिक ड्यूटी पर बाहर रहते हैं।

अस्वीकृति आदेश को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि सरकारी संस्थान में सहायक अध्यापकों के ट्रांसफर के लिए ऑनलाइन नीति के खंड 14 में प्रावधान है कि जब किसी संस्थान में प्रधानाध्यापक के साथ 2 से अधिक सहायक अध्यापक मौजूद हों तो ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है और जिला विद्यालय निरीक्षक को इस पर विचार करना चाहिए।

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न्यायालय ने माना कि प्रधानाध्यापक का जिला विद्यालय निरीक्षक और जिला मजिस्ट्रेट के प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त होना याचिकाकर्ता के ट्रांसफर आवेदन खारिज करने का वैध आधार नहीं है। यह माना गया कि याचिकाकर्ता के आवेदन पर अधिकारियों द्वारा विचार किया जाना चाहिए।

तदनुसार, याचिकाकर्ता का आवेदन खारिज करने में जिला विद्यालय निरीक्षक की कार्रवाई के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए रिट याचिका को अनुमति दी गई।

केस टाइटल: अनुज कुमार अग्रवाल बनाम यूपी राज्य और 4 अन्य [रिट – ए संख्या – 11572/2024]

 

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विवेक कुमार जैन
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