आगरा में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत ने 6.5 लाख से अधिक मामलों का निपटारा कर स्थापित किया एक नया कीर्तिमान

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आगरा, 13 सितंबर 2025

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा ) और उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशों पर, आगरा में शनिवार को एक विशाल राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया।

इस आयोजन ने आगरा जनपद में 6,56,167 वादों का निपटारा कर एक अभूतपूर्व सफलता हासिल की।

इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का उद्घाटन जनपद न्यायाधीश माननीय संजय कुमार मलिक ने दीप प्रज्ज्वलन और मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया।

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उद्घाटन समारोह में प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय माननीय श्रीमती तृप्ता चौधरी, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी माननीय नरेन्द्र कुमार पाण्डेय और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव डॉ. दिव्यानन्द द्विवेदी, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी माननीय मृत्युंजय श्रीवास्तव सहित कई वरिष्ठ न्यायिक अधिकारीगण उपस्थित रहे। इनके अलावा, विभिन्न बैंक, मोबाइल कंपनियों के प्रतिनिधि, पत्रकार, और बड़ी संख्या में वादकारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

न्यायालयों में मामलों का निपटारा:

* जनपद न्यायाधीश संजय कुमार मलिक ने 7 वादों का निपटारा किया, जबकि अन्य अपर जनपद न्यायाधीशों ने 767 वादों का समाधान किया और ₹5,78,200/- का जुर्माना लगाया।

* प्रधान न्यायाधीश श्रीमती तृप्ता चौधरी और अतिरिक्त परिवार न्यायालयों ने 155 पारिवारिक वादों का निस्तारण किया।

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* मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी नरेन्द्र कुमार पाण्डेय ने 175 वादों का निपटारा किया, जिसमें पीड़ित पक्षों को ₹16,33,96,166/- (लगभग ₹16.34 करोड़) की प्रतिपूर्ति राशि प्रदान की गई।

* मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और अन्य न्यायालयों ने कुल 69,157 वादों का निस्तारण किया और ₹2,23,64,284/- का जुर्माना लगाया।

* उपभोक्ता आयोग और वाणिज्यिक न्यायालयों ने 21 मामलों का समाधान किया और ₹5,74,788/- की राशि अधिरोपित की।

तहसील स्तर पर व्यापक निपटारा:

लोक अदालत का आयोजन केवल जिला मुख्यालय तक सीमित नहीं था, बल्कि तहसील स्तर पर भी इसका विस्तार किया गया।

* राजस्व से संबंधित 3,05,192 वादों का समाधान किया गया।

 

* यातायात चालान से संबंधित 8,141 मामलों का निपटारा किया गया।

* प्री-लिटिगेशन से संबंधित 2,71,076 वादों का निपटारा हुआ, जिसमें समझौते की राशि ₹87,106/- थी।

बैंकों और कंपनियों की भागीदारी:

प्री-लिटिगेशन लोक अदालत के माध्यम से विभिन्न बैंकों जैसे भारतीय स्टेट बैंक, यूको बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और अन्य वित्तीय संस्थाओं के कुल 1,476 वादों का निपटारा किया गया, जिसमें समझौते की धनराशि ₹14,14,00,000/- (लगभग ₹14.14 करोड़) रही।

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वादकारियों की सुविधा और शांति व्यवस्था:

पूरे आयोजन के दौरान, वादकारियों की सुविधा के लिए जगह-जगह पूछताछ केंद्र बनाए गए थे, जहाँ नामित अधिवक्ता और पराविधिक स्वयंसेवक मौजूद थे।

न्यायालय परिसर में भारी भीड़ और चहल-पहल के बावजूद, शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था। यह राष्ट्रीय लोक अदालत न्याय को लोगों के द्वार तक पहुँचाने और मुकदमों का त्वरित निपटारा करने के उद्देश्य को सफलतापूर्वक चरितार्थ करती है।

इस सफल आयोजन ने यह साबित कर दिया है कि लोक अदालतें मामलों को सौहार्दपूर्ण तरीके से निपटाने और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुलभ बनाने का एक प्रभावी माध्यम हैं।

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विवेक कुमार जैन
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