आगरा 26 मार्च ।
राणा सांगा विवाद में आर्य संस्कृति संरक्षण ट्रस्ट की ओर से दायर सिविल केस अजय प्रताप सिंह आदि बनाम अखिलेश यादव आदि में वादीगण के अधिकार के बिंदु की पोषणीयता पर सुनवाई 10 अप्रैल को होगी।
वादी अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने बताया कि 24 अप्रैल को माननीय न्यायालय में सिविल वाद दायर किया था जिसपर सुनवाई करते हुए माननीय न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि वादीगण ने यह अनुतोष चाहा है कि न्यायालय द्वारा यह तय किया जाए कि बाबर को इब्राहिम लोदी के विरुद्ध भारत पर आक्रमण करने के लिए दौलत खान लोदी ने आमंत्रित किया था न कि राणा सांगा ने एवं 17 मार्च 1527 ई० को सीकरी किले पर अंतिम निर्णायक युद्ध हुआ था न कि खानवा में, जिसके समर्थन वादीगणों ने विभिन्न ऐतिहासिक तथ्यों का उल्लेख किया व वर्ष 1883-4 का लाहौर गजेटियर भी प्रस्तुत किया।

वादीगणों के वाद को माननीय न्यायालय ने एक विशिष्ट घोषणा हेतु माना है जिस कारण माननीय न्यायालय उक्त घोषणा हेतु वादीगणों के अधिकार को जानना चाहता है जिसकारण वादीगणो के अधिकार के पोषणीयता के बिंदु पर न्यायालय 10 अप्रैल को सुनवाई करेगा।
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