बीमा होने के बावजूद मोबाइल मरम्मत से मना करना पड़ा भारी, उपभोक्ता आयोग प्रथम आगरा ने सुनाया सख्त फैसला

उपभोक्ता मामले न्यायालय मुख्य सुर्खियां

आगरा।

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम, आगरा ने उपभोक्ता के पक्ष में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए सैमसंग इंडिया और बीमा कंपनी ‘सर्वीफाई’ सहित अन्य प्रतिपक्षियों को सेवा में कमी का दोषी पाया है।

आयोग ने आदेश दिया है कि कंपनी या तो 45 दिनों के भीतर उपभोक्ता का मोबाइल मरम्मत करके चालू हालत में वापस करे, अन्यथा फोन की पूरी कीमत ब्याज सहित चुकानी होगी।

जानिए क्या था मामला ?

कचौड़ा बाजार, आगरा निवासी कुनाल गुप्ता ने 24 अप्रैल 2022 को 1,18,999/- रुपये में सैमसंग गैलेक्सी S-22 अल्ट्रा मोबाइल खरीदा था। खरीदारी के साथ ही उन्होंने 5,899/- रुपये का प्रीमियम देकर ‘सर्वीफाई’ कंपनी से मोबाइल का बीमा भी कराया था। लगभग पांच महीने बाद मोटरसाइकिल से गिर जाने के कारण मोबाइल क्षतिग्रस्त हो गया।

जब कुनाल ने अधिकृत सर्विस सेंटर पर फोन मरम्मत के लिए दिया और प्रोसेसिंग फीस जमा की, तो बीमा कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि उत्पाद का विवरण उनके रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहा है। कंपनी का तर्क था कि फोन का आईएमईआई (IMEI) और सीरियल नंबर पठनीय नहीं है।

Also Read – आगरा: बार काउंसिल चुनावों के चलते 16 और 17 जनवरी को न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे अधिवक्ता

उपभोक्ता आयोग प्रथम का निर्णय:

आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि:

* दस्तावेजों में कमी: विक्रेता ने खरीद रसीद पर आईएमईआई नंबर के बजाय बैच नंबर अंकित किया था, ऐसी स्थिति में कंपनी यह तर्क नहीं दे सकती कि नंबर बदल दिया गया है।

* सेवा में कमी: बीमा की शर्तों के अनुसार स्क्रीन या फोन क्षतिग्रस्त होने पर मरम्मत कराना बीमा कंपनी का उत्तरदायित्व था, जिससे उन्होंने मना कर दिया।

* संयुक्त जिम्मेदारी: आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि निर्माता कंपनी के अधिकृत विक्रेता द्वारा बीमा किया गया है, तो निर्माता कंपनी और विक्रेता भी सेवा प्रदाता के रूप में उत्तरदायी होंगे।

हर्जाने का आदेश:

आयोग ने प्रतिपक्षीगण को निम्नलिखित आदेश दिए हैं:

* मरम्मत: निर्णय के 45 दिनों के भीतर मोबाइल मरम्मत कर चालू हालत में लौटाया जाए।

* चूक पर भुगतान: यदि मरम्मत नहीं की जाती, तो फोन की कीमत 1,18,999/- रुपये पर 10 अप्रैल 2023 से भुगतान की तिथि तक 6% वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करना होगा।

* क्षतिपूर्ति: इसके अलावा, मानसिक पीड़ा के लिए 20,000/- रुपये और वाद व्यय के लिए 10,000/- रुपये भी देने होंगे।

* ब्याज में वृद्धि: यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया गया, तो ब्याज दर 6% से बढ़ाकर 9% वार्षिक कर दी जाएगी।

Stay Updated With Latest News Join Our WhatsApp  – Channel BulletinGroup Bulletin

विवेक कुमार जैन
Follow me

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *