आगरा/प्रयागराज।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उज्बेकिस्तान में दवाइयां भेजने वाली एक शिपिंग कंपनी के निदेशक मुकेश कुमार झा को बड़ी राहत प्रदान की है।
जस्टिस नंद प्रभा शुक्ला की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए गौतमबुद्ध नगर की निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) में चल रही मुकदमे की संपूर्ण कार्यवाही पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है।
कोर्ट ने इस मामले में सभी संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
मामले की पृष्ठभूमि और FIR के विवरण के अनुसार, याची मुकेश कुमार झा के विरुद्ध गौतमबुद्ध नगर के बीटा-2 थाने में 8 फरवरी 2025 को प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
यह FIR एक दवा निर्माता कंपनी के कर्मचारी की शिकायत पर दर्ज हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि याची की शिपिंग कंपनी के साथ उज्बेकिस्तान में दवाइयां पहुंचाने के लिए एक व्यावसायिक अनुबंध (Contract) हुआ था, जिसके लिए निर्धारित भुगतान भी कर दिया गया था।
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आरोप और विधिक तर्क के क्रम में शिकायतकर्ता का कहना था कि भुगतान के बावजूद समय पर दवाइयां नहीं भेजी गईं, जिसके कारण दवाइयां खराब हो गईं और कंपनी को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
इसी आधार पर याची के खिलाफ धोखाधड़ी और अमानत में खयानत (Breach of Trust) के गंभीर आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया था। याची ने इन आरोपों को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की और ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही को रद्द करने की मांग की।
हाईकोर्ट का हस्तक्षेप और वर्तमान स्थिति यह है कि अदालत ने दोनों पक्षों की प्राथमिक दलीलों को सुनने के बाद फिलहाल याची को अंतरिम राहत देना उचित समझा।
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब तक प्रतिवादी अपना पक्ष दाखिल नहीं करते, तब तक निचली अदालत में चल रही कार्यवाही स्थगित रहेगी। मामले की अगली सुनवाई अब 17 अप्रैल को नियत की गई है, जिसमें प्रतिवादियों के जवाब पर विचार किया जाएगा।
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