साइबर ठगों के चंगुल में फँसे आगरा के अधिवक्ता, कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज

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आगरा:

तमाम जागरूकता अभियानों और सुप्रीम कोर्ट की गंभीर चिंताओं के बावजूद साइबर अपराधी लगातार लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं।

इस बार अधिवक्ता और ग्रेटर आगरा बार के पूर्व सचिव गिरधारीलाल चौरसिया साइबर अपराध का शिकार हो गए, जिसके बाद एसीजेएम-5 माननीय पंकज कुमार ने थानाध्यक्ष लोहामंडी को मुकदमा दर्ज कर मामले की विवेचना करने का आदेश दिया है।

ऐसे हुआ साइबर फ्रॉड:
अधिवक्ता गिरधारीलाल चौरसिया ने अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर बताया कि यह घटना 10 अगस्त 2025 की शाम 6:20 बजे हुई।

* पहला संपर्क: एक व्यक्ति ने उन्हें फोन किया और एक मुकदमे में ‘पार्ट पेमेंट’ भेजने की बात कहते हुए उनका अकाउंट नंबर मांगा। अधिवक्ता ने उसे अपना गूगल पे (Google Pay) नंबर दिया।

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* विश्वास जीतना: आरोपी ने पहले उनके मोबाइल पर ₹50/- और फिर ₹5,000/- का मैसेज भेजा।

* धोखाधड़ी की चाल: कुछ ही देर बाद उसने दोबारा फोन किया और गलती का नाटक करते हुए कहा कि उसने गलती से उनके गूगल पे खाते में ₹49,050/- भेज दिए हैं, और उनसे अतिरिक्त धनराशि तुरंत वापस भेजने का अनुरोध किया।

* खाता साफ: जब अधिवक्ता ने रकम वापस भेजने की कोशिश की, तो ट्रांजेक्शन सफल नहीं हुआ। इसके बाद, उस व्यक्ति ने उन्हें एक यूपीआई आईडी नंबर दिया और उस पर रकम वापस करने को कहा। जैसे ही अधिवक्ता ने उस यूपीआई आईडी पर रकम भेजी, उनका खाता पूरी तरह से खाली हो गया।

शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं:

पीड़ित अधिवक्ता ने इस घटना के संबंध में थानाध्यक्ष लोहामंडी, साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 और पुलिस आयुक्त से शिकायत की थी, लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए, एसीजेएम-5 माननीय पंकज कुमार ने अधिवक्ता गिरधारीलाल चौरसिया के प्रार्थना पत्र पर संज्ञान लेते हुए मुकदमा दर्ज कर विवेचना के आदेश थानाध्यक्ष लोहामंडी को जारी किए हैं।

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विवेक कुमार जैन
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