अदालत से फरार घोषित आरोपी रेलवे की बैठक में हुआ शामिल, पुलिस और रेल प्रशासन से शिकायत

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आगरा।

चेक बाउंस के मामले में अदालत द्वारा फरार घोषित और सजायाफ्ता आरोपी के उत्तर मध्य रेलवे की एक महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है।

वादी के अधिवक्ता ने इस संबंध में साक्ष्यों के साथ पुलिस आयुक्त, डीआरएम और रेल मंत्रालय को शिकायती पत्र भेजकर आरोपी की गिरफ्तारी की मांग की है।

क्या है पूरा मामला ?

मामला कुलदीप दुबे बनाम देवेंद्र सिंह सविता उर्फ देवेंद्र का है। वादी के अधिवक्ता रोहित अग्रवाल के अनुसार, आरोपी देवेंद्र सिंह सविता ‘एल्मीको-आसरा’ आगरा में भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (भारत सरकार) का संचालक/निदेशक है और क्षेत्रीय रेल उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समिति (ZRUCC), उत्तर मध्य रेलवे का सदस्य भी है।

हाईकोर्ट और सत्र न्यायालय के आदेशों की अवहेलना:

अदालत द्वारा प्रतिकूल आदेश पारित होने पर आरोपी ने सत्र न्यायालय में अपील और उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।

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* उच्च न्यायालय का आदेश (18 नवंबर 2025): कोर्ट ने आरोपी को तीन किस्तों में (1 लाख, 1 लाख और 1.20 लाख रुपये) कुल राशि जमा करने का निर्देश दिया था। शर्त यह थी कि भुगतान न होने पर आदेश स्वतः निष्प्रभावी हो जाएगा।

* सत्र न्यायालय का रुख (18 दिसंबर 2025): आरोपी द्वारा किस्ते जमा न करने और अदालत में हाजिर न होने पर सत्र न्यायालय ने सजा बरकरार रखते हुए उसे जेल भेजने हेतु सजायाबी वारंट जारी करने के आदेश दिए थे।

फरारी की उद्घोषणा के बावजूद बैठक में उपस्थिति:

निचली अदालत में भी पेश न होने पर न्यायालय ने आरोपी के विरुद्ध गैर-जमानती वारंट (NBW) और फरारी की उद्घोषणा (धारा 82/83) जारी कर इसे समाचार पत्रों में प्रकाशित करने का आदेश दिया था।

हैरानी की बात यह है कि जिस आरोपी को पुलिस तलाश रही है, वह 30 जनवरी 2026 को उत्तर मध्य रेलवे की क्षेत्रीय रेल उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समिति की बैठक में सदस्य के रूप में शामिल हुआ। समाचार पत्रों में आरोपी की उपस्थिति की सूचना मिलते ही वादी पक्ष ने इसे कानून को चुनौती देना बताया है।

आलाधिकारियों से शिकायत:

वादी के अधिवक्ता रोहित अग्रवाल ने इस मामले में निम्नलिखित अधिकारियों को शिकायती पत्र प्रेषित कर कार्रवाई की मांग की है:

* डी.आर.एम. (DRM), उत्तर मध्य रेलवे

* पुलिस आयुक्त (Police Commissioner), आगरा

* जिलाधिकारी (DM), आगरा

* सचिव, रेल मंत्रालय, भारत सरकार

मुख्य विधिक बिंदु:

* आरोपी के विरुद्ध धारा 138 NI Act के तहत सजा और वारंट प्रभावी हैं।

* उच्च न्यायालय के सुरक्षात्मक आदेश (Protective Order) का पालन न करने पर वह निष्प्रभावी हो चुका है।

* सरकारी समितियों के सदस्य के रूप में फरार अपराधी की उपस्थिति प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है।

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विवेक कुमार जैन
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