आगरा।
सिकंदरा स्थित एक फैक्ट्री से लापता हुए युवक का शव नाले में मिलने के मामले में, न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम ) माननीय मृत्युंजय श्रीवास्तव ने थाना सिकंदरा पुलिस को फैक्ट्री मालिक और तीन कर्मचारियों के विरुद्ध हत्या एवं साक्ष्य मिटाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया है।
मामले की पृष्ठभूमि:
पीड़ित पक्ष के अनुसार, कस्बा बाह निवासी श्रीमती मीरा देवी का पुत्र जितेंद्र उर्फ जीतू ‘माहेश्वरी इंटरप्राइजेज’ सिकंदरा में टी-शर्ट और लोअर बनाने का कार्य करता था।
आरोप है कि फैक्ट्री के कर्मचारी रामनिवास, गार्ड धर्मा और कटिंग मास्टर रामदास जितेंद्र पर अतिरिक्त काम का दबाव बनाते थे और विरोध करने पर फैक्ट्री मालिक अंशुल माहेश्वरी से उसकी झूठी शिकायतें करते थे।
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घटनाक्रम और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल:
* 29 अक्टूबर 2025: फैक्ट्री कर्मी रामनिवास ने परिजनों को फोन कर बताया कि जितेंद्र बिना बताए कहीं चला गया है।
* 30 अक्टूबर 2025: परिजन जब फैक्ट्री पहुंचे, तो मालिक और कर्मचारियों ने उनके साथ अभद्रता की। आरोप है कि थाना सिकंदरा पुलिस ने गुमशुदगी की तहरीर मिलने पर भी केस दर्ज नहीं किया।
* 31 अक्टूबर 2025: पुलिस ने सूचना दी कि जितेंद्र का शव एक नाले में मिला है।
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साक्ष्य मिटाने का गंभीर आरोप:
मृतक की माता मीरा देवी ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि उनके पुत्र की हत्या की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि मामले को दबाने के लिए फैक्ट्री संचालक ने सीसीटीवी फुटेज डिलीट कर साक्ष्यों को नष्ट किया है।
न्यायालय का आदेश:
तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, सीजेएम माननीय मृत्युंजय श्रीवास्तव ने थानाध्यक्ष सिकंदरा को आदेश दिया है कि फैक्ट्री मालिक अंशुल माहेश्वरी, रामनिवास, धर्मा और रामदास के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर मामले की निष्पक्ष जांच की जाए।
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