आगरा:
मेवाड़ के शासक राणा सांगा पर दिए गए विवादास्पद बयान को लेकर चल रहे कानूनी मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश माननीय लोकेश कुमार न्यायालय संख्या-19/MP-MLA कोर्ट में सुनवाई हुई।
न्यायालय ने मामले की अगली तिथि 10 मार्च नियत की है।
स्थगन का कारण:
सुनवाई के दौरान विपक्षी संख्या-1, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के अधिवक्ता रईसुद्दीन की ओर से उनके लगातार अस्वस्थ होने के कारण सुनवाई स्थगित करने का प्रार्थना पत्र दिया गया।
न्यायाधीश माननीय लोकेश कुमार ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए शेष बहस के लिए मार्च की तिथि निर्धारित की है।
क्या है पूरा मामला ?
यह मामला सांसद रामजीलाल सुमन द्वारा राणा सांगा पर दिए गए एक बयान से उपजा है, जिसके विरुद्ध अजय प्रताप सिंह आदि ने सिविल रिवीजन (संख्या-119/2025) दाखिल की है।

वादी अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह के मुख्य तर्क:
* ऐतिहासिक तथ्यों का खंडन: अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि इतिहास के अनुसार बाबर को भारत पर आक्रमण के लिए दौलत खान लोदी ने आमंत्रित किया था। हिंदुओं में आपसी फूट डलवाने के उद्देश्य से राणा सांगा पर बाबर को बुलाने का गलत आरोप लगाया जाता है, जो ऐतिहासिक रूप से पूर्णतः त्रुटिपूर्ण है।
* विधिक प्रक्रिया पर सवाल: वादी पक्ष का तर्क है कि पिछले वर्ष 22 जुलाई को सिविल जज (सीनियर डिवीजन) ने इस वाद को ‘प्रतिनिधि वाद’ (Representative Suit) के रूप में दर्ज करने के प्रार्थना पत्र को खारिज कर पूरी कार्यवाही समाप्त कर दी थी।
* व्यक्तिगत क्षमता: वादी अधिवक्ता के अनुसार, यदि वाद प्रतिनिधि श्रेणी में नहीं आता, तब भी इसे ‘व्यक्तिगत क्षमता’ में सुना जाना चाहिए था। वाद को पूरी तरह समाप्त करना विधि विरुद्ध है।
वर्तमान स्थिति :
वर्तमान में यह रिवीजन याचिका एडीजे-19 न्यायालय में विचाराधीन है। 10 मार्च को होने वाली सुनवाई में वादी पक्ष अपनी दलीलों को आगे बढ़ाएगा, जिसमें ऐतिहासिक तथ्यों और कानूनी प्रक्रियाओं की बहाली पर जोर दिया जाएगा।
विधिक बिंदु:
यह मामला ‘सिविल रिवीजन’ के उस पहलू पर केंद्रित है जहाँ न्यायालय को यह तय करना है कि क्या निचली अदालत ने वाद को तकनीकी आधार पर खारिज कर क्षेत्राधिकार की त्रुटि की है।
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