चेक बाउंस मामला: सत्र न्यायालय ने अधीनस्थ कोर्ट का 20% अंतरिम मुआवजे का आदेश किया निरस्त

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आगरा।

चेक डिसऑनर (धारा 138 NI Act) के एक मामले में सत्र न्यायालय ने अधीनस्थ न्यायालय द्वारा पारित उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसमें आरोपी को चेक राशि का 20 प्रतिशत अंतरिम प्रतिकर (Interim Compensation) देने का निर्देश दिया गया था।

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ-23) माननीय अमित कुमार यादव ने मामले को पुनः सुनवाई के लिए अधीनस्थ न्यायालय को वापस भेज दिया है।

प्रकरण की पृष्ठभूमि:

यह मामला श्रीमती दिव्या सिंघल (प्रोपराइटर: मेसर्स बी.एम. प्रेम एंटरप्राइजेज, नबाबिया मार्केट, फुव्वारा, आगरा) द्वारा मनीष माहेश्वरी (संचालक: मेसर्स प्रीतू फार्मास्युटिकल, बदायूं) के विरुद्ध दायर किया गया था। वादिनी का आरोप था कि आरोपी द्वारा दिया गया चेक बैंक से बाउंस हो गया है।

अधीनस्थ न्यायालय का पूर्व आदेश:

मुकदमे के निस्तारण में हो रही देरी को देखते हुए वादिनी ने चेक राशि का 20 प्रतिशत अंतरिम मुआवजा दिलाने के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था।

इस पर सुनवाई करते हुए अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-4 (ACJM-4) ने आरोपी मनीष माहेश्वरी को आदेश दिया था कि वह कुल चेक राशि का 20% हिस्सा वादिनी को भुगतान करे।

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सत्र न्यायालय का हस्तक्षेप और निर्णय:

अधीनस्थ न्यायालय के इस आदेश के विरुद्ध मनीष माहेश्वरी ने अपने अधिवक्ता हम्माद हुसैन के माध्यम से सत्र न्यायालय में निगरानी (Revision) याचिका दायर की।

* बचाव पक्ष का तर्क: अधिवक्ता हम्माद हुसैन ने दलील दी कि अधीनस्थ न्यायालय का आदेश विधिक प्रक्रियाओं और तथ्यों के पूर्ण विश्लेषण के बिना पारित किया गया था।

* न्यायालय का आदेश: एडीजे-23 माननीय अमित कुमार यादव ने बचाव पक्ष के तर्कों को स्वीकार करते हुए अधीनस्थ न्यायालय के आदेश को निरस्त कर दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि इस प्रार्थना पत्र पर पुनः सुनवाई की जाए और विधि सम्मत नया आदेश पारित किया जाए।

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विवेक कुमार जैन
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