आगरा:
उत्तर प्रदेश के विधिक और शैक्षणिक क्षेत्र की महान विभूति, उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष डॉ. जे.के. पाठक का आज बीमारी के उपरांत हृदय गति रुकने (हार्ट अटैक) से निधन हो गया।
उनके निधन की खबर से अधिवक्ता समाज और शिक्षा जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
अधिवक्ताओं के ‘गुरुजी’ के रूप में थे विख्यात:
डॉ. जे.के. पाठक न केवल एक कुशल अधिवक्ता थे, बल्कि उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में भी अमिट छाप छोड़ी। वे आगरा कॉलेज के विधि संकाय (Law Faculty) के विभागाध्यक्ष रहे थे।
उनके पढ़ाए हुए हजारों छात्र आज देश के विभिन्न न्यायालयों में वकालत और न्यायिक सेवा में कार्यरत हैं। अपनी सौम्यता और ज्ञान के कारण वे अधिवक्ताओं के मध्य ‘गुरुजी’ के नाम से विख्यात थे।
संघर्षों के प्रतीक: हाईकोर्ट बेंच आंदोलन के पुरोधा
डॉ. पाठक ने कानूनी राजनीति के साथ-साथ सामाजिक लड़ाइयों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया:

* वे उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के अध्यक्ष के रूप में प्रदेश भर के वकीलों के हितों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहे।
* आगरा में उच्च न्यायालय खंडपीठ (High Court Bench) की स्थापना हेतु गठित संघर्ष समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने लंबे समय तक इस आंदोलन का नेतृत्व किया।
विभिन्न बार एसोसिएशनों ने दी श्रद्धांजलि:
उनके निधन की सूचना मिलते ही आगरा सहित प्रदेश की विभिन्न बार एसोसिएशनों में शोक सभाओं का आयोजन किया गया।
अधिवक्ताओं ने दो मिनट का मौन रखकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की और न्यायिक कार्यों से विरत रहकर उनके प्रति सम्मान प्रकट किया।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने उनके निधन को एक ‘अपूरणीय क्षति’ बताया है।
ईश्वर उनकी पुण्यात्मा को शांति प्रदान करे।
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