आगरा/प्रयागराज।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी और जालसाजी (Forgery) के गंभीर आरोपों में पिछले लंबे समय से जेल में बंद अजहर अनीस उस्मानी की जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने विभिन्न शर्तों के साथ आरोपी को रिहा करने का आदेश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति कृष्ण पहल की पीठ ने आरोपी के अधिवक्ता और सरकारी पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद पारित किया।
केस का विवरण:
* एफआईआर: आरोपी के खिलाफ प्रयागराज के जॉर्ज टाउन थाने में अपराध संख्या 415/2022 के तहत मामला दर्ज है।
* धाराएं: आरोपी पर आईपीसी की धारा 419, 420, 467, 468, 471, 406 और 506 (जालसाजी, धोखाधड़ी और धमकी) के तहत आरोप लगाए गए हैं।
बचाव पक्ष की मुख्य दलीलें:
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष निम्नलिखित तर्क प्रस्तुत किए:
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* लंबी न्यायिक हिरासत: आरोपी 13 सितंबर 2023 से लगातार जेल में है।
* ट्रायल में देरी: ढाई साल बीत जाने के बावजूद अब तक मुकदमे में एक भी गवाह का परीक्षण नहीं हो सका है।
* सुप्रीम कोर्ट का संदर्भ: अधिवक्ता ने ‘प्रभाकर तिवारी’ मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि केवल आपराधिक इतिहास या लंबित मुकदमे किसी व्यक्ति की जमानत रोकने का एकमात्र आधार नहीं हो सकते।
कोर्ट का फैसला और शर्तें:
अदालत ने केस की परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी को सशर्त जमानत प्रदान की है।
जमानत बरकरार रखने के लिए कोर्ट ने कड़ी शर्तें लागू की हैं:
* आरोपी साक्ष्यों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं करेगा।
* गवाहों को डराने या प्रभावित करने का प्रयास नहीं किया जाएगा।
* आरोपी को निचली अदालत में हर सुनवाई पर उपस्थित रहना होगा।
साथ ही हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि इनमें से किसी भी शर्त का उल्लंघन पाया जाता है, तो ट्रायल कोर्ट को जमानत निरस्त करने का पूरा अधिकार होगा।
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