हाईकोर्ट ने सरकार से अधिवक्ता कल्याण कोष ट्रस्ट के गठन की मांगी जानकारी
सरकार ने बताया 2020-21 व 2021-22 की राशि ट्रस्ट में की गई स्थानांतरित
आगरा /प्रयागराज 6 सितंबर।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से अधिवक्ता कल्याण कोष ट्रस्ट के गठन की विस्तृत जानकारी मांगी है। साथ ही पिछले आदेश का पालन करने का निर्देश दिया है। याचिका की सुनवाई 19 जुलाई को होगी।
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली तथा न्यायमूर्ति विकास बुधवार की खंडपीठ ने अधिवक्ता सुनीता शर्मा व प्रियंका श्रीवास्तव की जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।
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राज्य सरकार के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि सरकार ने वर्ष 2020-21 व 2021-22 की अधिवक्ता कल्याण स्टैंप से प्राप्त राशि का स्थानांतरण ट्रस्ट में कर दिया है।
याची अधिवक्ता विजय चंद्र श्रीवास्तव व पूजा मिश्रा का कहना है कि वर्ष 2020-2022 के दो सालों का 3 अरब,54 करोड,7 लाख,51 हजार रुपये ट्रस्ट में जमा नहीं किया गया है।
जिसके कारण अधिवक्ताओं के कल्याण की योजनाएं लागू नहीं हो पा रही है। अधिवक्ता कल्याण कूपन के जरिए सरकारी खजाने में वकीलों का पैसा जमा किया जाता है और सरकार वह राशि व्यय काटकर अधिवक्ता कल्याण कोष ट्रस्ट में स्थानांतरित करती है।
जिससे मृत अधिवक्ता आश्रितों को पांच लाख रूपए व युवा अधिवक्ताओं को तीन साल तक पांच हजार रुपए दिए जाने की व्यवस्था की गई है। फंड न होने के कारण युवा अधिवक्ताओं को मिलने वाली राशि की योजना खटाई में पड़ती है।
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याची अधिवक्ता श्रीवास्तव ने बताया कि बार काउंसिल के तत्कालीन अध्यक्ष मधुसूदन त्रिपाठी ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर अधिवक्ता चिकित्सा बीमा के तहत पांच लाख तक देने, वकीलों को भी आयुष्मान योजना से जोड़ने, बुजुर्ग अधिवक्ताओं को पेंशन योजना लागू करने तथा एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट पारित करने की मांग की थी।
जनहित याचिका में सभी मुद्दों को उठाया गया है।
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