आगरा के करोड़पति उद्योगपति की ‘दूसरी पत्नी’ को नहीं मिलेगा संपत्ति में हिस्सा, अदालत ने खारिज किया दावा

न्यायालय मुख्य सुर्खियां

आगरा।

शहर के एक प्रतिष्ठित उद्योगपति की मृत्यु के बाद उनकी करोड़ों की संपत्ति में हक जताने वाली दूसरी पत्नी की उम्मीदों को अदालत से बड़ा झटका लगा है।

न्यायालय ने हिंदू विवाह अधिनियम के प्रावधानों का हवाला देते हुए दूसरी पत्नी की याचिका को खारिज कर दिया और प्रथम पत्नी व उनके बच्चों को ही वैध वारिस माना है।

धोखे की बुनियाद पर टिका था रिश्ता:

मामले के तथ्यों के अनुसार, वादनी (दूसरी पत्नी) का विवाह वर्ष 2002 में शहर के एक प्रमुख उद्योगपति के साथ हुआ था। विवाह के समय उद्योगपति ने स्वयं को तलाकशुदा बताया था।

दोनों का एक पुत्र भी है, जो वर्तमान में 21 वर्ष का है। वर्ष 2013 में उद्योगपति की मृत्यु के बाद जब वादनी अपने ससुराल पहुँची, तब उसे पता चला कि उसके पति ने अपनी पहली पत्नी को तलाक दिए बिना ही उससे विवाह किया था। पहली पत्नी से उद्योगपति के चार बच्चे भी हैं।

Also Read – मॉडल से दुराचार और धोखाधड़ी के आरोपी की जमानत मंजूर, मेडिकल जाँच से इंकार करना बना ठोस आधार

वसीयत और कानूनी उत्तराधिकार पर छिड़ी जंग:

वर्ष 2015 में वादनी ने अपने और अपने पुत्र के हक के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान प्रथम पत्नी और उनके बच्चों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शैलेंद्र पाल सिंह एवं सुमित कुमार ने सशक्त पैरवी की।

उन्होंने अदालत के समक्ष निम्नलिखित तर्क रखे:

* शून्य विवाह (Void Marriage): हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 5 के अनुसार, यदि पहली पत्नी के जीवित रहते और बिना तलाक लिए दूसरा विवाह किया जाता है, तो वह कानूनन शून्य (Invalid) होता है।

* पंजीकृत वसीयत: मृतक उद्योगपति ने 9 जुलाई 2013 को एक वसीयत की थी, जिसमें उन्होंने अपनी समस्त चल संपत्ति पहली पत्नी के नाम और अपनी इंडस्ट्रीज आदि अपने बेटों (पहली पत्नी से) के नाम कर दी थी।

* वैधानिक स्थिति: क्योंकि वादनी का विवाह विधिक रूप से मान्य नहीं था, इसलिए वह और उसका पुत्र कानूनी वारिस की श्रेणी में नहीं आते।

Also Read – हाईकोर्ट के स्टे के बावजूद गिरफ्तारी: आगरा अदालत ने विवेचक के विरुद्ध पुलिस आयुक्त को दिए कार्रवाई के निर्देश

अदालत का निर्णय: राहत से इंकार

अदालत ने बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं के तर्कों से सहमति जताते हुए माना कि पहली पत्नी ही वैधानिक रूप से ‘पत्नी’ की श्रेणी में आती है।

कानून के प्रावधानों का उल्लंघन होने के कारण वादनी को उद्योगपति की संपत्ति में कोई भी हिस्सा देने से इनकार करते हुए अदालत ने मुकदमे को खारिज कर दिया।

विधिक टिप्पणी:

यह निर्णय स्पष्ट करता है कि हिंदू कानून के तहत बिना विधिक तलाक के किया गया दूसरा विवाह कोई कानूनी अधिकार प्रदान नहीं करता, चाहे वह रिश्ता कितने ही लंबे समय तक क्यों न चला हो।

Stay Updated With Latest News Join Our WhatsApp  – Group BulletinChannel Bulletin

विवेक कुमार जैन
Follow me

1 thought on “आगरा के करोड़पति उद्योगपति की ‘दूसरी पत्नी’ को नहीं मिलेगा संपत्ति में हिस्सा, अदालत ने खारिज किया दावा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *