आगरा उपभोक्ता आयोग प्रथम का बड़ा निर्णय: बैंक को गिरवी रखे जेवरात वापस करने और क्षतिपूर्ति देने का आदेश

उपभोक्ता मामले न्यायालय मुख्य सुर्खियां

आगरा:

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम, आगरा ने केनरा बैंक की सेवा में कमी पाते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

आयोग ने बैंक को आदेश दिया है कि वह परिवादिनी द्वारा गिरवी रखे गए सोने के जेवरात (झुमकी, पैंडल और अंगूठियां) वापस करे और मानसिक वेदना के लिए क्षतिपूर्ति का भुगतान करे।

मामले की पृष्ठभूमि:

परिवादिनी श्रीमती प्रीति चौधरी ने केनरा बैंक की एम.जी. रोड शाखा से अपने सोने के आभूषण गिरवी रखकर दो अलग-अलग गोल्ड लोन लिए थे।

विवाद तब शुरू हुआ जब बैंक ने दिसंबर 2022 में एक नोटिस भेजकर दावा किया कि उनके द्वारा गिरवी रखी गई चार सोने की चूड़ियों की शुद्धता कम पाई गई है।

परिवादिनी ने आरोप लगाया कि बैंक ने उनके मूल जेवरात बदलकर कम शुद्धता वाले जेवरात दिखा दिए हैं।

आयोग का विश्लेषण और निष्कर्ष:

सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आए कि:

दो लोन खाते: विवाद मुख्य रूप से खाता संख्या 180041116949 (सोने की चूड़ियां) को लेकर था, जबकि दूसरे खाते (संख्या 180041120781) के जेवरात की शुद्धता पर कोई विवाद नहीं था।

धोखाधड़ी के आरोप: बैंक ने दलील दी कि कई व्यक्तियों ने साठगांठ कर कम शुद्धता वाला सोना गिरवी रखकर लोन लिया था, जिसके संबंध में थाना हरीपर्वत पर FIR भी दर्ज कराई गई थी।

जटिल कानूनी प्रश्न: चूड़ियों की शुद्धता और उनके बदले जाने के आरोपों पर आयोग ने कहा कि इसके लिए विस्तृत साक्ष्य की आवश्यकता है और संक्षिप्त प्रक्रिया के तहत इसका निर्णय नहीं किया जा सकता। इसके लिए परिवादिनी सक्षम न्यायालय में दावा प्रस्तुत करने के लिए स्वतंत्र है।

सेवा में कमी: आयोग ने पाया कि जिस दूसरे लोन खाते (झुमकी, पैंडल, अंगूठी) के जेवरात पर कोई विवाद नहीं था, उसे भी बैंक ने वापस नहीं किया, जो कि ‘सेवा में कमी’ की श्रेणी में आता है।

आयोग का आदेश:

अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह की पीठ ने निम्नलिखित आदेश पारित किए:

जेवरात की वापसी: बैंक को आदेश दिया गया कि वह 45 दिन के भीतर खाता संख्या 180041120781 से संबंधित दो झुमकी, एक पैंडल और चार अंगूठियां, बकाया ऋण प्राप्त कर परिवादिनी को वापस करे।

क्षतिपूर्ति: बैंक परिवादिनी को मानसिक पीड़ा के लिए 10,000/- रुपये और वाद व्यय के रूप में 5,000/- रुपये (कुल 15,000/- रुपये) का भुगतान करेगा।

ब्याज: यदि 45 दिन के भीतर भुगतान नहीं किया जाता, तो बैंक को इस राशि पर 6% वार्षिक साधारण ब्याज देना होगा।

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विवेक कुमार जैन
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