आगरा न्यायालय का फैसला: दुराचार और पॉक्सो एक्ट के गंभीर मामले में आरोपी पुलिसकर्मी साक्ष्य के अभाव में बरी

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आगरा।

दुराचार, पॉक्सो एक्ट और जबरन गर्भपात कराने के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे एक पुलिसकर्मी को अदालत ने साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है।

विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) माननीय दिनेश कुमार चौरसिया की अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों और गवाहों के बयानों में पाए गए विरोधाभास को आधार मानते हुए आरोपी आलोक कुमार यादव को बरी करने का आदेश दिया।

आरोपी मूल रूप से मैनपुरी जिले के करहल थाना क्षेत्र स्थित कंचनपुर का निवासी है और उसकी तैनाती बागपत जिले के चांदी नगर थाने में थी।

न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत मामले के अनुसार, पीड़िता ने 22 जून 2023 को आगरा के थाना हरीपर्वत में आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।

प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि आरोपी ने वर्ष 2018 से 2020 के बीच शहर के विभिन्न होटलों में ले जाकर उसका शारीरिक शोषण किया।

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पीड़िता का दावा था कि आरोपी ने उसके अश्लील फोटो और वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल किया, जिसके कारण वह तीन बार गर्भवती हुई और आरोपी ने तीनों बार उसका जबरन गर्भपात करा दिया।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया था कि आरोपी पुलिसकर्मी ने अपनी दो कारों का प्रयोग कर उसे होटल ले जाने का काम किया। साथ ही, अश्लील फोटो के बल पर पीड़िता पर अपने चचेरे भाई के साथ भी संबंध बनाने का दबाव डाला गया और शिकायत करने पर गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी गई।

पीड़िता का मोबाइल हैक करने का भी आरोप लगाया गया था। बताया गया कि दोनों की जान-पहचान फेसबुक के माध्यम से हुई थी। चूँकि पीड़िता के पिता भी पुलिस विभाग में कार्यरत थे, इसलिए दोनों के परिवार पुलिस क्वार्टर में ही रहते थे।

न्यायालय ने इस प्रकरण में 13 सितंबर 2024 को आरोपी पुलिसकर्मी के विरुद्ध आरोप तय किए थे। विचारण के दौरान अदालत में पीड़िता सहित कुल 10 गवाहों की गवाही दर्ज की गई।

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बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद कुमार शर्मा और मनीष पाठक ने अदालत के समक्ष अपने तर्क प्रस्तुत किए।

जिरह के दौरान पीड़िता के बयानों में भारी विरोधाभास सामने आया। इसके अतिरिक्त, पीड़िता घटना की कोई निश्चित तिथि या उन होटलों का नाम बताने में पूरी तरह असमर्थ रही, जहां कथित तौर पर अपराध हुआ था।

अदालत ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोप सिद्ध करने में विफल रहा है।

अंततः साक्ष्यों के अभाव और बयानों में विरोधाभास को देखते हुए विशेष न्यायाधीश ने आरोपी पुलिसकर्मी को सभी आरोपों से बरी कर दिया।

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विवेक कुमार जैन
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