आगरा, 9 जून:
पश्चिमी उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण जनमंच ने आगरा में हाईकोर्ट खंडपीठ की स्थापना की मांग को लेकर अपना विरोध तेज कर दिया है। इसी कड़ी में आज जनमंच ने केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल का पुतला फूंका और उनके मेरठ के समर्थन में दिए गए बयान की कड़ी निंदा की। जनमंच ने साफ किया कि आगरा का हाईकोर्ट बेंच पर अधिकार है और इसे हर हाल में हासिल किया जाएगा।
आगरा में हाईकोर्ट खंडपीठ की मांग को लेकर वर्ष 1966 से आंदोलन चल रहा है। अधिवक्ताओं ने दिल्ली तक पैदल मार्च किए हैं, कई बार आगरा के आह्वान पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश बंद रहा है, और संसद भवन व ताजमहल का घेराव भी किया गया है। अधिवक्ताओं ने इस मांग के लिए लंबे-लंबे आंदोलन और 6-6 महीने तक की हड़तालें भी झेली हैं।
हाल ही में कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने बयान दिया था कि देश में दस हाईकोर्ट खंडपीठों की स्थापना पर विचार चल रहा है, जिसमें मेरठ का नाम सबसे ऊपर है, लेकिन इसमें आगरा का कहीं उल्लेख नहीं है। इस बयान के बाद अधिवक्ता समाज में भारी आक्रोश है। जनमंच ने इस बयान को ‘निंदनीय’ बताया है।
आज जनमंच द्वारा सिविल कोर्ट परिसर आगरा में कानून मंत्री का पुतला हाथों में लेकर नारेबाजी करते हुए एक आक्रोश रैली निकाली गई। इसके बाद गेट नंबर 2 पर अर्जुनराम मेघवाल का पुतला दहन किया गया। इस दौरान ‘कानून मंत्री मुर्दाबाद’, ‘वी वांट हाईकोर्ट’, और ‘हमें न चाहिए ताज और फोर्ट, हमें चाहिए हाईकोर्ट’ जैसे नारे लगाए गए। पुतला दहन के समय भारी संख्या में पुलिस बल तैनात था, और पुलिस व अधिवक्ताओं के बीच तकरार भी हुई, लेकिन अधिवक्ता पुतला दहन करने में सफल रहे।
पुतला दहन के बाद एक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में अधिवक्ताओं ने कहा कि आगरा को इंटरनेशनल एयरपोर्ट और इंटरनेशनल स्टेडियम भी नहीं मिला, और अब हाईकोर्ट बेंच की स्थापना में भी देरी की जा रही है। उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि आगरा ने 9 विधायक, 2 सांसद, एक मेयर सहित एमएलसी और तमाम पार्षद दिए हैं, लेकिन आगरा की आवाज सुनने वाला कोई नहीं है। अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि आगरा में ही हाईकोर्ट बेंच की स्थापना होकर रहेगी और मेरठ में इसकी स्थापना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
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अधिवक्ताओं ने जस्टिस जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें आगरा के पक्ष में सिफारिश की गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखंड के उत्तर प्रदेश से अलग होने के बाद आगरा का हाईकोर्ट खंडपीठ पर और अधिक अधिकार बनता है। जनमंच ने चेतावनी दी कि अब आंदोलन और उग्र होगा।
बैठक में यह भी घोषणा की गई कि यदि मेरठ में खंडपीठ की स्थापना की घोषणा होती है, तो आगरा इसे स्वीकार नहीं करेगा, और सरकार का कोई भी केंद्रीय मंत्री आगरा की धरती पर पैर नहीं रख पाएगा, जिसका अधिवक्ता और जनता मुखर होकर विरोध करेंगे। जनमंच ने केंद्रीय कानून मंत्री से अपने मेरठ के समर्थन में दिए गए बयान को तुरंत वापस लेने की मांग की है।
बैठक में यह भी तय किया गया कि 11 जून 2025 को दोपहर 12 बजे कानून मंत्री की बुद्धि शुद्धि के लिए यज्ञ किया जाएगा, और उसी दिन आगामी आंदोलन की घोषणा भी की जाएगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जनमंच अध्यक्ष चौधरी अजय सिंह एडवोकेट ने की, और संचालन पवन गुप्ता ने किया। इस अवसर पर इदेश कुमार यादव, सतीश समी, चौधरी हरदयाल सिंह, उदयवीर सिंह, अमर सिंह कमल, शिव कुमार सैनी, सुरेंद्र कुमार, दीपक शर्मा, शेर सिंह, अनिल विधौतिया, जितेंद्र चौहान, अजयदीप, पवन कुमार, कुलकुल, अशोक दीक्षित, चौधरी विशाल सिंह, मोहन लाल, राहुल, उमेश दीक्षित, अशोक दीक्षित सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे।
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