सिविल जज सीनियर डिवीजन ने 4 अप्रेल 2022 को मुकदमा कर दिया था खारिज
आदेश के विरुद्ध सत्र न्यायालय में की गई थी अपील
जिला शासकीय अधिवक्ता सिविल की पुरजोर पैरवी पर सरकार की हुई जीत
आगरा १७ मई ।
अमूमन सरकार की तरफ से लचर पैरवी, कतिपय स्वार्थ लिप्सा के चलते अदालतों में लंबित मुकदमों में सरकार को पराजय का सामना करना पड़ता है।
परन्तु आगरा के जिला शासकीय अधिवक्ता सिविल की पुरजोर पैरवी के चलते उक्त मामले में आखिकार सरकार को जीत मिल ही गयी।
मामले के अनुसार नाथू राम पुत्र मंगल सिंह निवासी माया नगर, जैतपुर कलां, तहसील बाह, जिला आगरा ने मथुरा-झांसी रेल लाईन योजना के विरुद्ध भारत संघ द्वारा जनरल मैनेजर उत्तर मध्य रेलवे इलाहाबाद, रेल विकास निगम लिमिटेड, मुख्य प्रोजेक्ट प्रबंधक रेल विकास निगम लिमिटेड, सीनियर सेक्शन इंजीनियर, जिलाधिकारी, अपर जिला अधिकारी भूमि अर्जन एवं अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व को पक्षकार बना सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में मुकदमा दायर किया गया था।
जिसे 4 अप्रैल 2022 को अदालत द्वारा खारिज करने पर नाथू राम ने सत्र न्यायालय में अधीनस्थ न्यायालय द्वारा पारित आदेश के विरुद्ध अपील की गई। नाथू राम का आरोप था कि वह मौजा जाजउ, तहसील खेरागढ़ आगरा का भूमिधर है ।
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उसका नाम राजस्व अभिलेखों में है, उक्त भूमि पर बिना अधिग्रहण मुख्य प्रोजेक्ट प्रबंधक रेल विकास निगम लिमिटेड द्वारा विकास कार्य कराया जा रहा है। रेलवे सीधे ही बिना बैनामा के जमीन खरीद रहा है। उसके द्वारा ना तो विधिक रूप से अधिग्रहण किया गया, ना ही मुआवजा दिया गया।
उक्त भूमि की सर्किल रेट 2,10,00,000/- रुपये प्रति हेक्टेयर है। बिना विधिक अधिग्रहण के वादी की भूमि पर विकास कार्य कराये जाने पर रोक लगाये जाने हेतु नाथू राम ने अदालत से आग्रह किया था। नाथूराम की अपील पर जिला शासकीय अधिवक्ता सिविल धर्मेंद्र कुमार वर्मा द्वारा पुरजोर पैरवी एवं बहस कर सिद्ध किया कि नाथूराम मथुरा -झांसी रेल लाईन निर्माण कार्य के समय वाद ग्रस्त भूमि का भूमिधर नही था।
बल्कि उसने साजिशन बाद में राजस्व अभिलेखों में नाम इंद्राज कराया गया । प्रश्नगत भूमि बीहड़ की भूमि है उस पर निर्माण कार्य पूर्ण कर रेल लाईन तक बिछा दी गई है ।
एडीजे 18 माननीय संगीता कुमारी ने जिला शासकीय अधिवक्ता सिविल धर्मेंद्र कुमार वर्मा के तर्क पर नाथू राम की अपील खारिज कर सरकार के पक्ष में फैसला पारित किया।
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