इलाहाबाद हाईकोर्ट: अब्दुल्ला आजम के दो पैन कार्ड मामले में अब 27 फरवरी को होगी अगली सुनवाई

उच्च न्यायालय मुख्य सुर्खियां

आगरा/प्रयागराज:

समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान और उनके पुत्र अब्दुल्ला आजम खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।

अब्दुल्ला आजम के दोहरे पैन कार्ड मामले में सजा बढ़ाने की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 फरवरी 2026 की तिथि निर्धारित की है।

मामले की मुख्य बातें:

* चुनौती: शिकायतकर्ता नवाब काजिम अली खान उर्फ ‘नावेद मियां’ ने रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें आजम खान और अब्दुल्ला आजम की सजा बढ़ाने वाली याचिका खारिज कर दी गई थी।

* याचिका का आधार: नावेद मियां ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में BNSS की धारा 528 के तहत याचिका दाखिल की है। उन्होंने 16 जनवरी 2026 को स्पेशल जज (MP/MLA) कोर्ट, रामपुर द्वारा पारित आदेश को रद्द करने की मांग की है।

* प्रतिवादी: इस याचिका में उत्तर प्रदेश राज्य सरकार के साथ-साथ आजम खान और अब्दुल्ला आजम खान को पक्षकार (प्रतिवादी) बनाया गया है।

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हाईकोर्ट में कार्यवाही का विवरण:

जस्टिस समित गोपाल की एकल पीठ (Single Bench) के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई।

सुनवाई के दौरान निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदु सामने आए:

* वकालतनामा दाखिल करने का समय: आजम खान और उनके पुत्र की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एन.आई. जाफरी ने कोर्ट से अपना वकालतनामा दाखिल करने के लिए समय की मांग की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

* कार्यवाही पर रोक की मांग: याचिकाकर्ता ने मांग की है कि रामपुर में एडिशनल सेशन जज (MP/MLA) के समक्ष आजम खान, अब्दुल्ला आजम और सरकार की ओर से दाखिल लंबित अपीलों की कार्यवाही पर तब तक रोक (Stay) लगाई जाए, जब तक हाईकोर्ट इस याचिका पर निर्णय नहीं ले लेता।

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पृष्ठभूमि:

यह पूरा विवाद अब्दुल्ला आजम खान द्वारा कथित रूप से दो अलग-अलग पैन कार्ड रखने से जुड़ा है। रामपुर की निचली अदालत ने इस मामले में उन्हें दोषी ठहराया था, लेकिन शिकायतकर्ता का तर्क है कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए दी गई सजा कम है।

16 जनवरी 2026 को रामपुर की अदालत ने क्रिमिनल रिवीजन याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि सजा बढ़ाने का पर्याप्त आधार नहीं है, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।

अब सभी की नजरें 27 फरवरी को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहाँ कोर्ट तय करेगा कि क्या रामपुर कोर्ट के फैसले की समीक्षा की आवश्यकता है या नहीं।

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मनीष वर्मा
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